Showing posts with label Congress. Show all posts
Showing posts with label Congress. Show all posts

G-23 फिर होंगे सक्रिय

हाल ही में हुए 5 राज्यों के चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन ने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में निराशा का भाव पैदा कर दिया है | पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की स्थिति नगण्य रही वहीँ केरल में वह सत्ता में वापिसी नहीं कर पाई जबकि केरल का इतिहास एक बार कांग्रेस दूसरी बार वाम सरकार था | कांग्रेस को केरल में आस इसलिए भी थी क्योंकि कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष केरल के वायनाड से सांसद है और उन्होंने यहाँ मेहनत भी की थी |

यही हाल पोंडिचेरी में भी देखने को मिला | चुनाव से पहले पोंडिचेरी में कांग्रेस सत्ता में थी लेकिन चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने उससे कुर्सी छीन ली और अब अगले 5 सालों के लिए उसे वनवास पर भेज दिया है | 

असम में भी कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक ही रहा है | वहां भी भाजपा ने मजबूती के साथ वापिसी की है | केवल तमिलनाडु में कांग्रेस गठबंधन के कारण सत्ता के इर्दगिर्द घूम सकती है |

अब कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीती क्षेत्रीय दलों की बैसाखी पर चलती दिख रही है |

कांग्रेस में असंतोष नेताओं की भी कमी नहीं है | वह लम्बे समय से कांग्रेस में परिवर्तन की मांग करते आये हैं | इन सब स्थिति को देखते हुए लगता है कि कांग्रेस के G-23 नेता फिर से सक्रीय हो सकते हैं | इससे कांग्रेसी के पुराने दिग्गजों को फिर से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है | 

डॉ. कन्हैया झा 

Dr. Kanhaiya Jha


कांग्रेस की नींव पर भाजपा की पुद्दुचेरी में फतह

पोंडीचेरी में NDA ने सत्ता पर अपना वर्चस्व बना लिया है | चुनाव से पहले कांग्रेस के बहुत से विधायक कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल गये गए थे | जिसका फायदा NDA को मिला | जो विधायक कांग्रेस छोड़कर आये तो उन्होंने जीत भी दर्ज की | 

पोंडिचेरी में भाजपा का गठबंधन AINRC के साथ था जबकि कोंग्रेस का गठबंधन DMK के साथ था | 

अब माना जा रहा है कि NDA के मुख्यमंत्री के लिए AINRC के अध्यक्ष रंगसामी ही सबसे मजबूत दाबेदार हैं | 

पोंडिचेरी छोटा सा केंद्रशासित राज्य है लेकिन राजनैतिक रूप से यह बहुत ही महत्वपूर्ण राज्य है | भाजपा के प्रवेश के बाद भाजपा दक्षिण के राज्यों में काम करने के लिए इसका उपयोग कर सकेगी |

अभी भारतीय जनता पार्टी की कर्णाटक के अलावा किसी भी राज्य में बड़ी पकड़ नहीं बनी है | पोंडिचेरी से भाजपा दक्षिण के राज्यों की तरफ बढ़ सकने में सफलता प्राप्त कर सकती है | 

हालंकि कांग्रेस यहाँ पर पिछले 5 वर्षों से गठबंधन में साथ में थे लेकिन उनका गठबंधन लोगों को यह समझाने में नाकामयाब रहा कि राज्य में किये गए कार्यों पर उन्हें वोट मिलना चाहिए | 

डॉ. कन्हैया झा 

Dr. Kanhaiya Jha

असम में फिर से गैर-कांग्रेसी सरकार

असम चुनाव के नतीजे बता रहे हैं कि राज्य में फिर से भाजपा की अगुवाई में NDA सत्ता में वापसी कर चुका है | इस जीत के साथ ही भाजपा ने इतिहास भी रचा है | ऐसा पहली बार हो रहा है कि कोई गैर-कांग्रेसी सरकार असम में दूसरी बार सत्ता की बागडोर को सम्हाल रही हो | 

हालाँकि की इससे पहले भी असम में सत्ता परिवर्तन हुए हैं लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि कांग्रेस को लगातार 2 बार सत्ता से बाहर होना पड़ा हो|  

इस चुनाव में NDA को 76 सीटों पर बढ़त मिली हुई है जबकि कांग्रेस पार्टी ने 46 सीटों पर अपनी बढ़त बरक़रार रखी है | कांग्रेस को सबसे ज्यादा नुकसान CAA का विरोध करने से हुआ | कांग्रेस ने AIUDF के साथ गठबंधन किया था जो जनता को पसंद नहीं आया और जनता ने कांग्रेस को सत्ता नहीं सौंपी| 

डॉ. कन्हैया झा 

Dr. Kanhaiya Jha  


कांग्रेस को मिली राहत

जब से केंद्र में नरेन्द्र मोदी की सरकार आई है तबसे कांग्रेस की मुसीबत बढती ही जा रही है | मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद ऐसा लगता है कि कांग्रेस का सूरज दिन प्रतिदिन ढलता ही जा रहा है | हाँ कभी कभी कुछ आशा की किरण भी जगती है | इसी आशा के सहारे कांग्रेस खुद को जिन्दा रखने का प्रयास कर रही है |

5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल ममता बनर्जी के पास गया, असम में भाजपा ने बाजी मारी, केरल में वामपंथियों ने अपना गढ़ बचा लिया और पुद्दुचेरी में NDA सत्ता पर काबिज हो गई | कांग्रेस को इन चार राज्यों में सत्ता की कुर्सी हांसिल नहीं हुई है | लेकिन दक्षिण के राज्य तमिलनाडू में कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा थी इसलिए वह सत्ता के गलियारों में उठ बैठ सकती है | हालाँकि यहं भी कांग्रेस को केवल 3 प्रतिशत वोट ही मिले | लेकिन कहा गया हैं न डूबते को तिनके का सहारा| यही बात चरितार्थ हो रही है | 

तमिलनाडु में कांग्रेस ने खुद को द्रमुक गठबंधन का हिस्सा बना लिया था | हो सकता है जब ,मंत्री पद की घोषणा हो तो कांग्रेस के भी कुछ लोगों को यहाँ सरकार का हिस्सा बनने का मौका दिया जाये | हालाँकि कांग्रेस के रणनीतिकार तमिलनाडु में जिस प्रकार के परिणाम की अपेक्षा कर रहे थे परिणाम उनके अपेक्षा के अनुरूप नहीं आये फिर भी कहीं तो सत्ता के गलियारों में कांग्रेस को भी जगह मिली | 

डॉ. कन्हैया झा 
Dr. Kanhaiya Jha

केरल में कांग्रेस की हार का कारण ‘कलह’

केरल में वामपंथियों ने अपनी सरकार बचाने में फिर से एक बार सफलता प्राप्त कर ली | केरल का रोटेशन ख़त्म हुआ | एक बार कांग्रेस तथा एक बार वाम दलों की सरकार बनने का इतिहास रहा है | लेकिन अभी हुआ विधानसभा चुनानों में केरल में कांग्रेस को जनता ने नकार दिया है | इस तरफ पांच राज्यों में हुए चुनाव में कांग्रेस कहीं भी सरकार में नहीं आ सकती | हालाँकि तमिलनाडु में वह गठबंधन में थी वहां कांग्रेस को केवल 3 प्रतिशत मत ही प्राप्त हुए |

आखिर कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ होने की क्या वजह रही | जबकि कम से कम केरल का तो इतिहास रोटेशन सरकार का रहा है | सबसे पहले कोरोना संकट के दौरान केरल में जिस प्रकार का प्रबंधन हुआ उसकी चर्चा पूरे देश में है | इतनी बड़ी भारी तबाही से राज्य की जनता को बचाने का इनाम जनता ने वाम दलों को दिया है | दूसरा केरल में कांग्रेस पार्टी कई धड़ों में बंट चुकी हैं | केरल कांग्रेस के नेताओं का आपसी कलह समाप्त ही नहीं हो रहा है| जब आपस में एकता नहीं होगी तो चुनाव कैसे जीते जायेंगे | दूसरी और कांग्रेस ने अपने किसी भी उम्मीदवार को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया | इससे राज्य के अन्दर पहले के मुख्यमंत्री पर ही लोगों ने अपना विश्वास जताया | यहाँ तक के कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ओमान चांडी को भी पार्टी ने कोई तबज्जो नहीं दी | हालाँकि राहुल गाँधी केरल के वायनाड से सांसद है और उन्होंने वहां कुछ समय लगाया भी | लेकिन उनका लगाया हुआ समय पार्टी को विजय रथ पर नहीं बैठा सका | 

डॉ. कन्हैया झा 

Dr. Kanhaiya Jha


नयी सरकार की चुनौतियां

राजनैतिक दलों ने अपने घोषणा-पत्र में कई महत्वाकांक्षी योजनाओं का जिक्र किया है, जिनके लिए बजट में धन की व्यवस्था करना एक चुनौती होगी. केंद्र सरकार एक वर्ष में लगभग 15 लाख करोड़ रुपये  खर्च करती है, जबकि करों आदि से सरकार को केवल 9.4 लाख करोड़ रुपये प्राप्त होता है. यदि सरकार की आमदनी को 100 रुपये मानें तो सरकार का खर्च 160 रुपये होता है, जिसके लिए वह हर साल 60 रुपये बाज़ार से उधार लेती है. बाज़ार से लिए उधार पर सरकार हर वर्ष केवल ब्याज दे पाती है.

सरकार के कुल खर्च को यदि 100 रुपये मानें तो केवल 33 रुपये योजना खर्च (प्लान) के लिए होता है. बाकी 67 रुपये अनियोजित खर्चों जैसे वेतन, पुरानी योजनाओं के रख-रखाव आदि के लिए होते हैं.

योजनाओं को लागू करने के लिए अनियोजित खर्चों को कम करना नयी सरकार के लिए एक चुनौती होगी. इस खर्चे के मुख्य तीन मद ब्याज, अनुदान तथा रक्षा-तंत्र हैं. वित्त वर्ष 2013-14 के अंत तक सरकार की कुल देन-दारी लगभग 56 लाख करोड़ रुपये थी, जो पिछले कई वर्षों से 5-6 लाख करोड़ रुपये प्रति वर्ष की दर से बढ़ती जा रही है. इस देन-दारी की वजह से अनियोजित खर्च का लगभग 33 प्रतिशत केवल ब्याज चुकाने पर लग जाता है. कीमतों को स्थिर रखने के लिए सरकार खाद्य पदार्थों, उर्वरक, तथा पेट्रोलियम पर अनुदान देती है. नयी सरकार यदि रक्षा मंत्रालय के खर्चे को कम करती है तो उसे संसद में भीषण विरोध का सामना करना पडेगा. उपरोक्त तीनों मदों को जोड़ा जाय तो सरकार के पास अनियोजित खर्च के मद में केवल 27 प्रतिशत बचता है, जिसमें से उसे सरकारी कर्मचारियों को वेतन देना होता है. महंगाई भत्ते आदि के इसमें लगातार वृद्धि होती रहती है. फिर नए वेतन आयोग का भी गठन किया जा चुका है, जिसकी विभीषिका भी अगली सरकार ही झेलेगी.  

प्रायः अनियोजित खर्चा अनुमान से अधिक हो जाता है. इसके अलावा सरकार कर-संग्रहण भी अनुमान से कम कर पाती है. बाज़ार से उधार के लिए निकाले गए बांड्स भी पूरी तरह निवेशित नहीं हो पाते. इन तीनों कारणों से योजना खर्च को और कम करना पड़ता है. वित्त-वर्ष 2012-13 में योजना खर्च में लगभग 21 प्रतिशत की कमी करनी पडी.

वित्त वर्ष 2014-15 के लिए अंतरिम बजट पेश करते हुए केन्द्रीय वित्त-मंत्री की कुछ घोषणाएं इस प्रकार से थीं:-


  • वित्त वर्ष 2013-14 के कर-संग्रह में लगभग 70 हज़ार करोड़ का घाटा होने की संभावना है जिसे बाज़ार से उधार लेकर पूरा किया जाएगा.
  • पेट्रोलियम अनुदान के 35 हज़ार करोड़ रुपये की देनदारी जो वित्त-वर्ष 2013-14 में देनी थी उसका भुगतान वित्त वर्ष 2014-15 में किया जाएगा.
  • वित्त-वर्ष 2014-15 में योजना खर्च उतना ही रखा गया है जितना की वर्ष 2013-14 में था.
प्रतिवर्ष सरकार करों से लगभग 15 प्रतिशत अधिक आमदनी करती है. फिर राज्य सरकारें अलग से अपने कर लगाती हैं. इस सबसे महंगाई बढ़ती है, जो योजनाओं को भी महंगा कर देती हैं, जबकि योजनाओं के लिए प्रावधान में कोई बढ़ोतरी नहीं होती. देश के तीव्र विकास के लिए नयी सरकार को कुछ नए तरीके से सोचना अवाश्यक होगा.



Kanhaiya Jha

(Research Scholar)

Makhanlal Chaturvedi National University of Communication and Journalism,

Bhopal, Madhya Pradesh

+919958806745, (Delhi) +918962166336 (Bhopal)

Email : kanhaiya@journalist.com

Facebook : https://www.facebook.com/kanhaiya.jha.5076